Bank Nominee Rule 2025 : भारत में बैंकिंग प्रणाली में हाल के दिनों में एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है, जो बैंक धारणकर्ताओं के लिए नई संभावनाओं के दरवाजे खोलेगा। अब एक बैंक खाते में अधिकतम चार नॉमिनियों को जोड़ा जा सकेगा। यह बदलाव राज्यसभा में बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक के पारित होने के बाद लागू हुआ है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि इस नए नियम का क्या मतलब है और यह आम जनता के लिए किस प्रकार फायदेमंद साबित होगा।
नॉमिनेशन नियमों में बदलाव का संक्षिप्त अवलोकन
पहले, बैंक खाताधारकों को अपने खाते में केवल एक नॉमिनी जोड़ने की अनुमति थी, जिससे विवादों का जन्म होता था। अब, नए नियम के तहत चार नॉमिनियों को जोड़ने की अनुमति मिलने से खाताधारकों को अपनी संपत्तियों का बंटवारा करने में अधिक लचीलापन मिलेगा। इससे न केवल पारिवारिक विवादों में कमी आएगी, बल्कि वित्तीय संपत्तियों का बंटवारा भी सरल हो जाएगा।
सिमल्टेनियस और सक्सेसिव नॉमिनेशन
इस नए संशोधन में नॉमिनेशन की दो प्रमुुख विधियाँ जोड़ी गई हैं:
सिमल्टेनियस नॉमिनेशन: इस विधि में, खाताधारक यह तय कर सकता है कि उसके खाते में जमा धन को नॉमिनियों के बीच किस अनुपात में बांटा जाएगा। जैसे कि तीन नॉमिनियों को 40:30:30 के अनुपात में धन का बंटवारा करने का विकल्प मिलेगा।
सक्सेसिव नॉमिनेशन: इस प्रणाली में, पैसों का वितरण एक क्रम में होगा। अगर पहले नॉमिनी की मृत्यु हो जाती है या वह उपलब्ध नहीं होता है, तो धन दूसरे नॉमिनी को मिलेगा, और इसी तरह से जारी रहेगा। यह नियम अप्रत्याशित घटनाओं के मामले में धन के प्रवाह को सरल बनाता है।
बैंक लॉकर के लिए नए नॉमिनेशन नियम
बैंक लॉकर के लिए नॉमिनेशन नियमों को भी अपडेट किया गया है। लॉकर के मामले में केवल सक्सेसिव नॉमिनेशन की अनुमति होगी। इसका मतलब है कि अगर पहले नॉमिनी की अनुपस्थिति होती है, तो दूसरा नॉमिनी लॉकर का अधिकार संभालेगा। यह स्पष्टता और पारदर्शिता को सुनिश्चित करता है, विशेषकर जब लॉकर में मूल्यवान सामान या दस्तावेज होते हैं।
ग्राहकों पर नए नियमों का प्रभाव
इस नए नियम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे अनक्लेम्ड डिपॉजिट में कमी आएगी। RBI के आंकड़ों के अनुसार, अनक्लेम्ड डिपॉजिट की मात्रा मार्च 2024 तक ₹78,213 करोड़ तक पहुँच गई थी। इस समस्या का एक मुख्य कारण नॉमिनी का न होना और खाताधारकों की मृत्यु के बाद जानकारी का अभाव है।
परिवारों के लिए लाभ
नए नियम के अनुसार, अब नॉमिनियों को बिना किसी कानूनी दस्तावेज के खाते से पैसे निकालने की अनुमति होगी। इससे परिवारों के लिए बैंक खातों में जमा धन तक पहुँच आसान हो जाएगी, और इसके परिणामस्वरूप कानूनी जटिलताओं से बचा जा सकेगा। पारिवारिक सदस्य अब बिना विवादों के धन का बंटवारा कर सकेंगे, जो कि एक महत्वपूर्ण पहलू है।
बैंकों के लिए फायदे
बैंकों के लिए इस नए नियम का पालन करना भी आसान होगा। नॉमिनी अधिकारों की स्पष्टता से विवादों में कमी आएगी, जिससे बैंकों का प्रशासनिक कार्य सरल हो जाएगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि अनक्लेम्ड डिपॉजिट के प्रबंधन में भी कमी आएगी।
निष्कर्ष
इस नए नॉमिनेशन नियम ने भारतीय बैंकिंग प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाया है। यह खाताधारकों को अपने धन का वितरण अधिक विवेकपूर्ण तरीके से करना संभव बनाता है, जिससे परिवारों में विवादों की संभावना घटती है। साथ ही, यह बैंकों के लिए कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने का एक अवसर प्रदान करता है। यह बदलाव न केवल ग्राहकों की शिकायतों को कम करेगा, बल्कि बैंकिंग प्रणाली की दक्षता को भी बढ़ाएगा।
यदि आपके पास इस नए नियम से संबंधित कोई प्रश्न या चिंता है, तो कृपया अपने बैंक से संपर्क करें या वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें। इस बदलाव का फायदा उठाना न भूलें, ताकि आप और आपका परिवार आर्थिक रूप से सुरक्षित रह सके।